इर्ना की रिपोर्ट के अनुसार इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने चीन के न्यूज़ चैनल फ़ोनिक्स से बात करते हुए जो शुक्रवार की रात प्रसारित हुआ, कहा कि फ़ार्स की खाड़ी में अमरीकी युद्धपोत की उपस्थिति के इससे पहले कि सकारात्मक प्रभाव होते यह वास्तव में तनाव पैदा होने का कारण बनी और अमरीका जब भी फ़ार्स की खाड़ी में अपने उपस्थिति को बढ़ाते हैं तो फ़ार्स की खाड़ी के सभी देशों के लिए ख़तरा पैदा हो जाता है।
श्री जवाद ज़रीफ़ का कहना है कि ईरान, शक्तिशाली देश है और वह अपने हितों की रक्षा कर सकता हिै और यह क्षेत्र वह है जो अमरीका की उपस्थिति से नुक़सान उठा सकता है और मुझे नहीं लगता कि अमरीका, ईरान को धमकाने की पोज़ीशन में है।
विदेशमंत्री ने सीरिया से अमरीकी सैनिकों के निष्कासन के बारे में कहा कि हमें अभी तक नहीं पता कि अमरीका का क्या कार्यक्रम है और जो कुछ हमारे लिए महत्वपूर्ण है, वह यह है कि क्षेत्र में अमरीका की नीति, एक ख़तरनाक नीति है जिसका बदला जाना बहुत ज़रूरी है।
श्री जवाद ज़रीफ़ ने कहा कि ईरान कभी भी आपातकालीन स्थिति में अमरीका से वार्ता नहीं करेगा, वह पक्ष जो वार्ता से निकला, ईरान नहीं बल्कि अमरीका था, आठ महीने परमाणु समझौते में बाक़ी रहा, हमसे वार्ता की किन्तु उससे निकल गया और उसे स्वयं वार्ता की ओर पलटना होगा।
विदेशमंत्री ने कहा कि चीन से ईरान का संबंध, एक रणनैतिक संबंध है न कि एक तकनीकी और कुछ समय के लिए, चीन, ईरान के लिए एक विश्वसनीय मित्र है और हम चीनियों पर भरोसा कर सकते हैं।